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एक जर्मन जो उत्तराखंड के गांव का प्रधान बना

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This video tells the true story of Frederick Smetacek Jr., a German-born man who chose the Kumaon Himalayas as his home. Rejecting a senior government position in Germany, he became the village head (Pradhan) of Bhaktuyda near Bhimtal, Uttarakhand. Known as the “Butterfly Man of India,” Freddie dedicated his life to forest conservation, protecting banj oak trees, and fighting land encroachment long before environmentalism became a trend. This is a rare real-life story of identity, ecology, and resistance from the hills of Uttarakhand. ‪@Thirdpolelive‬

यह वीडियो उत्तराखंड के भीमताल से जुड़ी एक अनोखी और सच्ची कहानी है। फ्रेडरिक स्मेटाचेक जूनियर एक जर्मन मूल के व्यक्ति थे, जिन्होंने जर्मनी की सरकार में सचिव का पद ठुकराकर कुमाऊँ में ही रहना चुना। वे भीमताल के भक्तूयड़ा गाँव के पहले प्रधान बने और बांज के जंगलों, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया। ‘बटरफ्लाई मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से पहचाने जाने वाले फ्रेडी साहब की यह कहानी उत्तराखंड के पर्यावरण आंदोलन, भीमताल इतिहास और सच्चे पहाड़ी जीवन को करीब से दिखाती है।

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