इस पॉडकास्ट में Hindustan और Amar Ujala जैसे राष्ट्रीय अख़बारों में उत्तराखंड और हिमाचल में कई वर्षों तक सेवाएँ दे चुके वरिष्ठ पत्रकार Girish Gururani बताते हैं कि किस तरह उत्तराखंड में सत्ता से जुड़ी खबरों का स्वर बदला जाता है। बातचीत में यह भी सामने आता है कि कैसे न्यूज़रूम के भीतर खबरें दबती हैं, आलोचना की जगह प्रशंसा छपने लगती है और मीडिया धीरे-धीरे जनता के असली सवालों से दूर होता चला गया है। इस चर्चा में उत्तराखंड और हिमाचल की राजनीति, विकास की सोच, भूमि नीति, चुनावी खर्च और बढ़ते भ्रष्टाचार जैसे अहम मुद्दों पर भी खुलकर बात की गई है।
यह पॉडकास्ट केवल मीडिया की भूमिका पर नहीं, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ढांचे और सत्ता-मीडिया संबंधों पर गंभीअर सवाल खड़े करता है। पूरा पॉडकास्ट देखें @thirdpolelive पर।



